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मध्यप्रदेश से उभर रही देसी रक्षा तकनीक, ड्रोन खतरे का स्मार्ट सॉल्यूशन तैयार
· विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम
इंदौर। मध्यप्रदेश से एक अहम पहल सामने आई है, जहां एक इंडियन स्टार्टअप देश की सिक्योरिटी को और मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। बढ़ते ड्रोन खतरे ने सिक्योरिटी सिस्टम के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड एक एडवांस सिस्टम तैयार कर रही है। यह कंपनी ड्रोन की पहचान करने, उन्हें रोकने और सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही है। यह कंपनी भारत सरकार के उद्योग संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त है और रक्षा इनोवेशन प्लेटफार्म में भी रजिस्टर्ड है।
आज भारत कई जरूरी रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी सिस्टम्स पर निर्भर है, जैसे रडार, सर्विलांस सिस्टम और एंटी ड्रोन-टेक्नोलॉजी। इस निर्भरता के कारण इमरजेंसी में दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी पहल देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है। हाल के वर्षों में बॉर्डर एरिया में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने खतरे को और गंभीर बना दिया है, जिससे देसी सॉल्यूशन की जरूरत साफ दिखाई देती है।
गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड जिन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है, उनमें ऐसे सिस्टम शामिल हैं जो रेडियो सिग्नल, साउंड और विजुअल इनपुट के जरिए दूर से ही ड्रोन को डिटेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा फास्ट रिस्पॉन्स इंटरसेप्टर ड्रोन भी तैयार किए जा रहे हैं, जो दुश्मन ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें न्यूट्रलाइज कर सकें।
इसके साथ ही ऑपरेटर्स के लिए ट्रेनिंग सिमुलेशन सिस्टम भी बनाया जा रहा है, जिससे रियल सिचुएशन का अभ्यास सुरक्षित माहौल में किया जा सके। इंटीग्रेटेड कंट्रोल सिस्टम के जरिए अलग-अलग सोर्स से मिलने वाले डेटा को एनालाइज कर तुरंत डिसीजन लेने में मदद मिलेगी। गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की ये सभी टेक्नोलॉजी पूरी तरह डिफेंसिव पर्पस के लिए तैयार की जा रही हैं और केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों के लिए ही उपयोग में लाई जाएंगी।
आज के समय में टेक्नोलॉजी का तेजी से बदलता स्वरूप सिक्योरिटी सेक्टर के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है। ड्रोन का उपयोग जहां एक ओर सुविधाएं बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ी है। ऐसे में स्मार्ट मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम और ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स जैसी सुविधाएं बेहद जरूरी हो गई हैं। यह पहल न केवल खतरों को समय रहते पहचानने में मदद करेगी, बल्कि सिक्योरिटी एजेंसियों को तेजी से एक्शन लेने के लिए भी सक्षम बनाएगी।
इसके अलावा इस तरह की इनोवेटिव पहल से युवाओं के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर में बढ़ती संभावनाएं स्टार्टअप कल्चर को मजबूत कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने से देश के इंजीनियर्स और प्रोफेशनल्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर प्लेटफॉर्म मिल रहा है। यह पहल आने वाले समय में भारत को ग्लोबल डिफेंस टेक्नोलॉजी मैप पर एक मजबूत पहचान दिलाने में भी मदद कर सकती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्वदेशी रक्षा टेक्नोलॉजी का विकास न सिर्फ सिक्योरिटी को मजबूत करता है, बल्कि इकॉनमी को भी बूस्ट देता है। इससे इन्वेस्टमेंट बढ़ता है, नए जॉब्स क्रिएट होते हैं और देश टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बनता है। मध्यप्रदेश से शुरू हुई यह पहल अब पूरे देश के लिए एक मजबूत डिफेंस इनोवेशन के रूप में देखी जा रही है।


